गुनगुनाने और बरामरी प्राणायाम करने से नाइट्रिक ऑक्साइड बढ़ता है जो बीपी कंट्रोल करता है
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित ने बताया कि गुनगुनाने से नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ सकता है, खासकर नाक और साइनस में। हालाँकि यह गरारे करने के बजाय गुनगुनाने के लिए सबसे अधिक जाना जाता है, पर यह दोनों ही ध्वनि-संबंधी क्रियाएँ वायु परिसंचरण को प्रभावित करती हैं। गुनगुनाने से नाइट्रिक ऑक्साइड कैसे बढ़ता है।साइनस वेंटिलेशन: जब आप गुनगुनाते हैं, तो नाक के साइनस में कंपन पैदा होता है। यह कंपन हवा के प्रवाह को बढ़ाता है, जिससे साइनस में नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन और परिसंचरण बढ़ जाता है।15 गुना वृद्धि: अध्ययनों में पाया गया है कि शांत साँस लेने की तुलना में गुनगुनाने से नासिका नाइट्रिक ऑक्साइड में 15 गुना तक की वृद्धि हो सकती है। नाइट्रिक ऑक्साइड का महत्व शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड एक महत्वपूर्ण अणु है, जिसके कई फायदे हैं: रक्त संचार में सुधार: यह रक्त वाहिकाओं को आराम देकर उन्हें चौड़ा करता है, जिससे रक्त का प्रवाह बेहतर होता है और रक्तचाप कम होता है।रोग प्रतिरोधक क्षमता: यह शरीर को बीमारी पैदा करने वाले कीटाणुओं से बचाने में मदद करता है।श्वसन प्रणाली में सुधार: यह वायुमार्ग को आराम देता है और उन्हें संकुचित होने से रोकता है, जिससे श्वास संबंधी समस्याओं में मदद मिल सकती है। गुनगुनाने का सही तरीका।गुनगुनाने के लिए आपको बस अपने मुँह को बंद रखकर नाक से धीरे-धीरे साँस छोड़नी होती है, जिससे “हम्म” की ध्वनि निकले। यह एक साधारण क्रिया है जिसे आप दिन में कभी भी कर सकते हैं।






